Udgyo Rang Sundar Thari Kaya Ro
उड़ग्यो रंग सुन्दर थारी काया रो
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उड़ग्यो रंग सुन्दर थारी काया रो, कोई दिन आयेगो बुढ़ापा को ॥ टेक ॥
राम नाम तू कदे न लीनो, दान न करियो एक पाई रो,
कोई दिन आयेगो बुढ़ापा को ॥1॥
बालपणो हस खेल में गमायो, बुढ़ापा में रोग सतायो,
इयौड़ो अवसर नही आवा को, कोई दिन आयेगो बुढ़ापा को ॥2॥
बेटा थारा मुण्डे न बोले, कड़िया सु कर चाबीया खोले,
कोने अवसरियो सेवा करवा को, कोई दिन आयेगो बुढ़ापा को ॥3॥
कर ले कमाई यो दिन फेर न आवे, नाथ गुलाव कहे समझावे,
यो दिन फेर न आवेगा, कोई दिन आयेगो बुढ़ापा को ॥4॥
✍️ रचयिता: नाथ गुलाव
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