Chetavni Bhajan

Bhai Mhara Do Din Ro Mehman

भाई म्हारा दो दिन रो मेहमान

👁 28 views
▶ यहीं चलाएँ · Play here
Text size:
तेरा संगी कोई नही, सब स्वारथ बंधी लोइ। मन परतीति न उपजै, जीव बेसास न होइ।। दोहा अमर नही रेवणो रे भाई म्हारा दो दिन रो मेहमान। बालपणो खेलत गयो रे भाई, जोबन त्रिया जाल। दौड़ बुढ़ापो आवियो रे, थारे लागी खेंचातान।। टेक ॥ भाई बंधु थारो कुटुम्ब कबीलो रे, सब मतलब रा जाण। नारी देह तज देवसी रे, थारो करे न आदर मान।।1॥ माल खजाना हाट हवेली रे, सब ही झूठा जाण। सब धरिया रह जावसी रे, जब निकल जायगो प्राण।।2॥ जैसे जल रो बुदबुदो रे भाई, वैसी काया जाण। दिखतडो मिट जावसी रे, थारो रहे नहीं नाम निशान।।3॥ झुठी काया झुठी माया रे भाई, झुठो आदर मान। कहे कबीर भज लिजिए रे, एक सांचो हरि रो नाम।।4॥

✍️ रचयिता: कबीर

Related Bhajans