Chetavni Bhajan

Rat Man Ram Budhapo Aayo

रट मन राम बुढ़ापो आयो

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यहीं चलाएँ · Play here
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रट मन राम बुढ़ापो आयो। भरी जवानी मद में छायो मुग्ध ठगायो ॥ टेक ॥ कथा भागवत हरिकीर्तन राम भजन नहीं भयो। विषयां माँहि भटकती डोले आख्यां अंधेरी छायो ॥1॥ इन्द्रियों उत्तर दियो तन धूजे तृष्णा अधिक सतायो। कुटुंब अतलियो अंबरबेल ज्यूँ सारो पेड़ सुकायो ॥2॥ आगी हार बार जद मेली कोई न पानी लायो। अब पछतावे क्या होवेगा करयो कर्म भरपायो ॥3॥ बेटा बहु बात नहीं माने मांचो बाहर लगायो। परमानन्द कहे राम भजन बिन फोकट जगत हसायो ॥4॥

✍️ रचयिता: परमानन्द

इस भजन के बारे में

यह भजन संत परमानंद जी द्वारा रचित है, जो हमें जीवन की नश्वरता और समय रहते प्रभु भक्ति करने की प्रेरणा देता है। इसका भावार्थ यह है कि मनुष्य अपनी जवानी के मद में इतना खो जाता है कि वह ईश्वर का नाम लेना भूल जाता है। जब बुढ़ापा आता है और शरीर साथ छोड़ देता है, तब उसे अपनी गलतियों का अहसास होता है। संत हमें सचेत करते हैं कि अंत समय में पछताने से कुछ नहीं होगा, क्योंकि तब तक इंद्रियां शिथिल हो जाती हैं और मोह-माया का जाल हमें पूरी तरह जकड़ लेता है।

यह भजन भगवान श्री राम की भक्ति को समर्पित है। भक्त इसे विशेष रूप से वैराग्य और आत्म-चिंतन के क्षणों में गाते हैं। इसे गाने का उद्देश्य मन को सांसारिक मोह से हटाकर प्रभु के चरणों में लगाना है। यह हमें याद दिलाता है कि परिवार और दुनियादारी के रिश्ते अंत में साथ नहीं देते, केवल प्रभु का नाम ही सच्चा साथी है। इस भजन को सुनने या गाने से मन में वैराग्य जागता है और व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बनाने के लिए ईश्वर की शरण में जाने का संकल्प लेता है।

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