Chetavni Bhajan

Panchhi Dalal Aachhi Padhiyo Re Ulti Pati

पंछी डालाल आछी पढ़ियो रे उलटी पाटी

👁 31 views
▶ यहीं चलाएँ · Play here
Text size:
पंछी डालाल आछी पढ़ियो रे उलटी पाटी, ईश्वर ने तू भूल गयो रे लाख चौरासी काटी ॥ टेक ॥ लख चौरासी में घणो दुख पायो, पायो दिन ने राती, अब आयो थारो बुढ़ापो, लीनी हाथ में लाठी ॥1॥ चार पावणा घर में आया, घाले चुरमो बाटी, भुखा प्यासा साधु आवे, घाले छांछ खाटी ॥2॥ दूध बेच्यो दही बेच्यो, बेची छांछ खाटी, माया जोड़ खाडा में घाली, ऊपर नाखी माटी ॥3॥ जीव जंतु ने मार मार ने, बदन बणायो काटी, एक जीव रे कारणे, कितरी गर्दन काटी ॥4॥ कहत कबीर सुनो भाई साधो, छोड़ो उलटी पाटी, एक दिन सबको जाना पड़ेगा, यमराज री घाटी ॥5॥

✍️ रचयिता: कबीर

Related Bhajans