Chetavni Bhajan

Maat Pita Su Dukho Karela

मात-पिता सूं दुखो करेला

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मात-पिता परमात्मा, पति सेवा गुरु ज्ञान। इनसे हिलमिल चालिए, वो नर चतुर सुजान॥ दोहा मात-पिता री चाकरी, कर ले चित लगाय। चार धाम चरणां मिले, जनम मरण मिट जाय॥ श्लोक मात-पिता सूं दुखो करेला, चार जनम दुख पावे। लख चौरासी फिरै भटकतो, सीधो नरक में जावे रे, मनवा, इतरो क्यूं इतरावे॥ ॥ टेक ॥ पेहलो जनम में बणेला बलदियो, पकड़ तेली घर लावे। आँखियां रे थारे पाटो बांध ने, अल्टो चक्कर चलावे रे, मनवा, इतरो क्यूं इतरावे॥ ॥1॥ दूजा जनम में बणेला बन्दरियो, पकड़ मदारी घर लावे। पाप नहीं ओ एक जनम रो, सात जनम दुख पावे रे, मनवा, इतरो क्यूं इतरावे॥ ॥2॥ तीजा जनम में बणेला बकरियो, पकड़ कसाई घर लावे। उल्टो टेर ने छुरी फेरला, बे-बे कर मर जावे रे, मनवा, इतरो क्यूं इतरावे॥ ॥3॥ चौथा रे जनम में बणेला गधेड़ो, पकड़ कुम्हार घर लावे। बिन टोलियां माथे बोझ धरले, डंडा चोर लगावे रे, मनवा, इतरो क्यूं इतरावे॥ ॥4॥ बंगला बनायो तू दौलत कमाई, संचे लोक लुगाई। माता-पिता बीमार भुगते, कुण लावे वां रे दवाई। एड़ी मत ना करे रे भाई, मात-पिता दुख पावे रे, मनवा, इतरो क्यूं इतरावे॥ ॥5॥

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