Khel Khiladi Khila Raha
खेल खिलाड़ी खिला रहा
📥 Bhajan Poster
Add to list
Loading…
▶
यहीं चलाएँ · Play here
Text size:
खेल खिलाड़ी खिला रहा, जिन्दगी दो दिन का खेला है।
हर कोई आता यहां अकेला, जाता खेल अकेला है ॥ टेक ॥
जिन्दगी एक खेल है इसको खेल समझकर खेला कर।
जिन्दगी कोई बोझ नहीं इसे हँस-हँस करके झेला कर।
साफ कर दे राह के कांटे, आगे का कुछ गैला कर।
अच्छी बातें रख दिल में, बेकार ना मन को मेला कर।
पर हित में नित धेला धर, हर पल संकट का झमेला है ॥1॥
जीवन के इस खेल में कोई, जीता तो कोई हारा है।
हार के भी हिम्मत ना हारे, मेहनत एक सहारा है।
जीवन रण हथियार डाले, खुद को समझ बेचारा है।
कौन बचाये, उस कायर जो, भाग के जाता मारा है।
यहाँ होता सबका गुजार है, यहाँ हर कोई अलबेला है ॥2॥
खेल का मैदान यहाँ, नित रोज खिलाड़ी आते है।
अपना अपना खेल दिखा, अपनी करणी कर जाते है।
जिसमें दम मैदान में टिकता, चलते ना रिश्ते नाते है।
जितना समय दिया खेलन को, खेल उतना ही पाते है।
यहा सुख दुख की कई राते है, जिन्दगी दो दिन का मेला है ॥3॥
आया है इस जग में प्यारे, ऐसा खेल खेल जाना।
तेरे खेल को याद करे सब, लेकर नाम जमाना।
जीवन का संगीत तेरा यहाँ, गुजे सदा तराना।
अशोक पंछी लिखे रागनी, जी में आये तो गाना।
ऐसा राग सुना जाना, जैसे चले नदी में रेला है ॥4॥
✍️ रचयिता: अशोक पंछी
गलती / शिकायत बताएं
क्या ठीक नहीं है? चुनें — admin जल्दी सुधार देगा।
🙏 धन्यवाद! आपकी शिकायत admin तक पहुँच गई।