Chetavni Bhajan

Kehna Kehna Sabko Aave

कहना कहना सबको आवे

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कहना कहना सबको आवे, सुनना ना कोई चावे। जिसने सुनना सीख लिया वो, कभी नहीं दुख पावे ॥ टेक ॥ बहू सुने ना सास की ना, सास बहू की सुनती है। बिना सुने ही मां बेटी और, पिता पुत्र ना बनती है। इक दूजे की बिना सुने कभी, सच्चाई ना छनती है। कोई किसी की बात सुने ना, यही शिकायत चलती है। सांच सदा कड़वी होती जो, असली चेहरा दिखावे ॥1॥ गुरू की बात सुणे ना चेला, तो ज्ञान का हो अंधियारा। भाई की सुणे ना भाई, तो हो घर का बंटवारा। घर की नारी ना सुणे पति की, टूटे घर परिवार। बाप की बात सुने ना बेटा, बन जाता आवारा। कहने और सुनने से हर का, मन हल्का हो जावे ॥2॥ गाने वाले बीस मिले, सुनने वाला ना एक मिले। हो गये सब कहने वाले तो, कैसे जग का काम चले। कोई किसी की नहीं सुने, अपनी अपनी ही आप दले। जिस सत्संग ना सुनने वाले, कैसे तो फिर रात ढले। मन अन्दर ये बात खले, अब कौन किसे समझावे ॥3॥ सुनना सीख लियो लोगो, सुनने को बात हजार मिले। कहे एक और सुने दूसरा, समझ बढ़े और सार मिले। प्रेम से कहना प्रेम से सुनना, खार रहे ना प्यार मिले। अशोक पंछी कहे चुरी का, जीने का आधार मिले। सुखी फेर संसार मिले, सत् संगत् गोता खावे ॥4॥

✍️ रचयिता: अशोक पंछी

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