Chetavni Bhajan

Haan Mein Haan Aur Na Mein Na

हाँ में हाँ और ना में ना

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हाँ में हाँ और ना में ना, दिल में कुछ मुँह में अलग जुबान। बच के रहना जग में लोगों, मिल जाये ऐसे इन्सान ॥ दोहा ॥ जैसा कहाओ कह देंगे ये, रात को दिन और दिन को रात। पागल बन के सुन लेंगे ये, आपके दिल की पूरी बात। दुश्मन का पता कब मारे, पर इनकी ना कोई जात। अपना बनके साथ रहे और, देख के मौका करते घात। धोखा देके मारे लात, कर लेना तुम इनकी पहचान ॥1॥ मीठे बनके घर में घुसे, थारे तलवों को सहलायेंगे। चिकनी चुपड़ी बातें कर, थारे घर में जगह बनायेगे। घर के अन्दर क्या कमियाँ है, बाहर तक पहुँचायेंगे। कर देंगे बदनाम तुम्हे जब, असली रूप में आयेंगे। भाईयों में बैर करायेंगे, ऐसा सौदा है इनकी दुकान ॥2॥ हाँ में हाँ मिलाकर के ये, भैंस को ऊँट बता दे आप। मतलब खातिर बना लेते ये, गधे को भी अपना बाप। गली-गली लिये झूठ की गठरी, बेच रहे है करके जाप। इनकी कोई जात नहीं है, होती इक न्यारी ही खाप। झगड़ा करा हँसे चुपचाप, सुने दीवार लगाके कान ॥3॥ मौका देख बदल दे पाला, इनके चक्कर में मत आना। झूठी बात फैलानी हो जग में, इनके कान में कह जाना। बिना भौकते कुत्ते को तो, दूर से ही देना खाना। पता नहीं ये कब काटेगे, इनका है ये रोग पुराना। अशोक पंछी तू लिख जाना, मांनेगा इक दिन जगत महान ॥4॥

✍️ रचयिता: अशोक पंछी

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