Chetavni Bhajan

Bahu Banini Har Ghar Chanve

बहु बनीणी हर घर चाँवे

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बहु बनीणी हर घर चाँवे, बेटी ना कोई चाह वे। बिन बेटी ना बहु टपक के, आसमान से आवे ॥ टेक ॥ माँ कहती मेरे बेटे खातिर, सुन्दर सी बहू लाना। सुन्दर नैन नक्श गोरी हो, पढ़ी लिखी और गुणवाना। गहनों से लद घर आये, मेरा खाली भरे खजाना। धूम धाम से शादी हो, जब अचरज करे जमाना। बिन बेटी बेटे की माँ भी, बहू के सपने सजावे ॥1॥ बेटी मार बहू मांगे ये, कैसे बेटे के बाप है। अपनी मार और की मांगे, क्यों करते ये पाप है। बेटी देकर बहू मिलेगी, हुये ये अब हालात है। रहेंगे घणे कुवारे लड़के, ना बचा धर्म कोई जात है। अकल ठिकाने आयेगी जब, लड़का ना ब्याहा जावे ॥2॥ जिनके घर ज्यादा बेटी वो, आज भी धनवान हैं। जिनके घर बेटी ना हो, उनकी बिगड़ी संतान है। बेटी का सारा खर्चा, संग में देता भगवान है। बिन बेटी के घर सूना, वहाँ रहते तो हैवान है। बिन कन्या घर पानी पीना, धर्म भी पाप बतावे ॥3॥ गिनती में बेटे बेटी से, जब ज्यादा हो जायेगे। बेटे वाले बेटी के घर, नाक रगड़ते आयेगे। मांगेगा दहेज तो धक्के, मारके भगायेगे। वो दिन दूर नहीं लोगों, बेटे घर बाराती आयेगे। अशोक पंछी गायेगे, भगवान वो दिन दिखलावे ॥4॥

✍️ रचयिता: अशोक पंछी

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