
सिंह वाहन (विनायक स्वरूप) की कथा
Sinh Vahan (Vinayak Swaroop) Ki Katha
यद्यपि भगवान गणेश का सर्वप्रसिद्ध वाहन मूषक है, किंतु पुराणों और विशेषकर मुद्गल पुराण तथा गणेश पुराण में उनके अनेक अवतारों और स्वरूपों का वर्णन है, जिनमें कुछ स्वरूपों में उन्हें सिंह (शेर) पर विराजमान भी दर्शाया गया है। यह सिंहवाहन स्वरूप गणपति के पराक्रमी, शक्तिशाली और असुर-संहारक रूप का प्रतीक है, जो यह दर्शाता है कि विघ्नहर्ता केवल सौम्य ही नहीं, अपितु अपार बल के भी स्वामी हैं।
कथा के अनुसार, जब पृथ्वी और देवलोक पर किसी अत्यंत बलशाली असुर का अत्याचार अत्यधिक बढ़ गया, तब भक्तों और देवताओं की पुकार सुनकर भगवान गणेश ने एक विशेष उग्र और तेजस्वी स्वरूप धारण किया। इस स्वरूप में उन्होंने सिंह को अपना वाहन बनाया, क्योंकि उस पराक्रमी असुर के संहार के लिए सिंह जैसा बलशाली और निर्भय वाहन ही उपयुक्त था। सिंह पर विराजमान गणपति का यह रूप देखते ही असुर-सेना में भय व्याप्त हो गया।
सिंहवाहन स्वरूप में भगवान गणेश ने अपने अनेक हाथों में विविध दिव्य आयुध धारण किए और अत्यंत तेज के साथ असुरों का सामना किया। उनका यह रूप माता दुर्गा के सिंहवाहन स्वरूप की स्मृति दिलाता है, जो यह संकेत देता है कि गणपति में शक्ति (पार्वती) का भी अंश विद्यमान है। जहाँ मूषक-वाहन उनकी सूक्ष्मता और विवेक का प्रतीक है, वहीं सिंह-वाहन उनके अदम्य साहस, तेज और धर्म-रक्षक सामर्थ्य का प्रतीक है।
इस स्वरूप को विशेषकर "विनायक" नाम से भी संबोधित किया जाता है, जो नायकों के भी नायक, अर्थात् सर्वोच्च मार्गदर्शक और नेता का द्योतक है। सिंह पर विराजमान विनायक यह संदेश देते हैं कि जब भक्तों पर संकट आता है और अधर्म बढ़ता है, तब गणपति सौम्यता त्यागकर उग्र और शक्तिशाली रूप धारण कर धर्म की रक्षा करते हैं। इस प्रकार वे केवल विघ्नों को हरने वाले ही नहीं, अपितु दुष्टों का दमन करने वाले भी हैं।
भक्तगण गणेश जी के इस सिंहवाहन विनायक स्वरूप का ध्यान तब करते हैं जब वे जीवन के भय, शत्रु और बाधाओं पर विजय की कामना करते हैं। यह स्वरूप उन्हें यह विश्वास दिलाता है कि जब तक गणपति की कृपा है, तब तक कोई भी संकट, कोई भी भय उन्हें पराजित नहीं कर सकता। सिंह पर विराजमान गणपति की छवि साहस, बल और अभय का दिव्य संचार करती है।
इस कथा का भाव यही है कि ईश्वर सौम्य भी हैं और शक्तिशाली भी; भक्तों की रक्षा के लिए गणपति सिंह जैसा पराक्रमी रूप भी धारण करते हैं, जो हमें अधर्म और भय के विरुद्ध निर्भय रहने की प्रेरणा देता है।