
प्रथम पूज्य का वरदान — शिव और देवताओं का आशीर्वाद
Pratham Pujya Ka Vardaan - Shiv Aur Devtaon Ka Aashirwad
जब बालक गजमुख धारण कर पुनः जीवित हुआ और माता पार्वती का हृदय शांत हुआ, तब भगवान शिव ने समस्त देवताओं की उपस्थिति में इस दिव्य बालक को अनेक वरदान प्रदान किए। सर्वप्रथम उन्होंने उसे अपने समस्त गणों का स्वामी नियुक्त किया, इसीलिए वह "गणेश" और "गणपति" कहलाया — अर्थात् गणों का ईश। यह पद स्वयं शिव-शक्ति की अनुकंपा से प्राप्त हुआ।
फिर भगवान शिव ने घोषणा की — "हे पुत्र! तुम समस्त देवताओं में सर्वप्रथम पूजे जाओगे। किसी भी शुभ कार्य, यज्ञ, अनुष्ठान अथवा पूजा के आरंभ में जो तुम्हारा स्मरण और पूजन नहीं करेगा, उसका कार्य निर्विघ्न सिद्ध नहीं होगा। और जो सर्वप्रथम तुम्हारी वंदना करेगा, उसके समस्त विघ्न दूर हो जाएँगे।" इस प्रकार गणेश जी को "प्रथम पूज्य" और "विघ्नहर्ता" का सर्वोच्च पद प्राप्त हुआ।
इस वरदान के पीछे एक कथा भी प्रचलित है कि एक बार देवताओं में यह प्रश्न उठा कि सबसे पहले किसका पूजन हो। तब यह निर्णय हुआ कि जो सबसे पहले समस्त ब्रह्मांड की परिक्रमा कर लौट आएगा, वही अग्रपूज्य होगा। कार्तिकेय अपने मयूर वाहन पर ब्रह्मांड की परिक्रमा को निकल पड़े, किंतु बुद्धिमान गणेश जी ने अपने माता-पिता शिव-पार्वती को ही समस्त ब्रह्मांड मानकर उनकी सात बार परिक्रमा की और बोले — "माता-पिता के चरणों में ही समस्त तीर्थ और समस्त ब्रह्मांड निहित हैं।" इस विवेक से प्रसन्न होकर उन्हें प्रथम पूज्य का पद मिला।
समस्त देवताओं ने भी बारी-बारी से गणेश जी को आशीर्वाद दिए। ब्रह्मा जी ने उन्हें बुद्धि और विद्या का दाता बनाया, विष्णु जी ने उन्हें ऐश्वर्य और शुभता प्रदान की, इंद्र आदि देवताओं ने उन्हें अपने-अपने अंश से बल और तेज दिया। स्वयं माता पार्वती ने वरदान दिया कि जो भक्त श्रद्धा से गणेश का स्मरण करेगा, उसके जीवन से समस्त बाधाएँ दूर होंगी और उसे रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होगी।
इस प्रकार जो बालक कुछ ही क्षण पूर्व एक द्वारपाल मात्र था, वह अब समस्त लोकों का आराध्य, बुद्धि और विवेक का अधिष्ठाता तथा हर मंगल कार्य का आरंभ-देव बन गया। तभी से हर पूजा, हर विवाह, हर गृह-प्रवेश और हर नए कार्य का शुभारंभ "श्रीगणेशाय नमः" से होता है।
इस कथा का भाव यही है कि विवेक, विनम्रता और माता-पिता की सेवा से ही सच्ची महानता प्राप्त होती है; गणपति का अग्रपूजन इसी सद्भाव और मंगल का प्रतीक है।