Gajmukh Dharan - Hathi Ka Mastak Lagna

गजमुख धारण — हाथी का मस्तक लगना

Gajmukh Dharan - Hathi Ka Mastak Lagna

जब माता पार्वती ने अपने पुत्र का कटा हुआ शरीर देखा, तो उनका करुण क्रंदन और प्रलयंकारी रूप देखकर समस्त देवगण भयभीत हो उठे। माता ने घोषणा की कि यदि उनका पुत्र पुनः जीवित न हुआ, तो वे संपूर्ण सृष्टि का संहार कर देंगी। तब भगवान शिव ने माता को शांत करते हुए वचन दिया कि उनका पुत्र न केवल पुनर्जीवित होगा, अपितु समस्त लोकों में सबसे अधिक पूजनीय भी बनेगा।

भगवान शिव ने अपने गणों को आज्ञा दी — "उत्तर दिशा की ओर जाओ। वहाँ तुम्हें जो भी पहला प्राणी सिर उत्तर की ओर करके सोता हुआ मिले, उसका मस्तक श्रद्धापूर्वक ले आओ।" शिवगण तत्काल उत्तर दिशा की ओर चल पड़े। कुछ ही दूरी पर उन्हें एक बलशाली गजराज (हाथी) उत्तराभिमुख होकर विश्राम करता हुआ मिला। गणों ने विधिपूर्वक उसका मस्तक लाकर भगवान शिव को अर्पित किया।

भगवान शिव ने उस गजमुख को अत्यंत श्रद्धा और मंत्रोच्चार के साथ बालक के धड़ पर स्थापित किया और अपनी योगशक्ति से उसमें प्राणों का संचार किया। देखते ही देखते बालक पुनः जीवित हो उठा — अब उसका मुख गजराज का था, विशाल और सुंदर, दो बड़े कर्ण, सूँड और तेजस्वी नेत्रों से युक्त। यह गजमुख स्वरूप ही आगे चलकर उनकी सबसे प्रिय पहचान बन गया, जिससे वे "गजानन", "गजवदन" और "विनायक" कहलाए।

माता पार्वती का हृदय हर्ष से भर उठा। उन्होंने अपने पुत्र को पुनः पाकर उसे गले लगाया, किंतु फिर भी उनके मन में यह शंका रही कि गजमुख होने के कारण कहीं लोग उसका उपहास न करें। तब भगवान शिव और समस्त देवताओं ने वरदान दिया कि यह बालक कभी उपहास का पात्र नहीं बनेगा, अपितु सर्वप्रथम पूजनीय होगा और इसके गजमुख स्वरूप की ही सर्वाधिक महिमा गाई जाएगी।

गजमुख का यह स्वरूप गूढ़ आध्यात्मिक अर्थ रखता है — हाथी का विशाल मस्तक विवेक और बुद्धि का प्रतीक है, बड़े कान अधिक सुनने और कम कहने की शिक्षा देते हैं, छोटे नेत्र सूक्ष्म दृष्टि के, और सूँड सूक्ष्म-स्थूल दोनों में समान सामर्थ्य की प्रतीक है। इस प्रकार गणपति का स्वरूप ही समस्त सद्गुणों का साकार रूप बन गया।

इस कथा का भाव यही है कि जीवन में जो कुछ भी खोता प्रतीत होता है, ईश्वर की कृपा से वह और भी दिव्य रूप में लौट आता है; गजानन का यही स्वरूप हर विघ्न को हरने वाला और मंगलकारी है।

🔗 Open Link / Video →

Related Stories

Ganesh Janm - Parvati Dwara Ubtan Se Balak Ka Srijan

गणेश जन्म — पार्वती द्वारा उबटन से बालक का सृजन

Ganesh Janm va Swaroop
Shiv-Ganesh Yuddh Aur Balak Ka Mastak Katna

शिव-गणेश युद्ध और बालक का मस्तक कटना

Ganesh Janm va Swaroop
Pratham Pujya Ka Vardaan - Shiv Aur Devtaon Ka Aashirwad

प्रथम पूज्य का वरदान — शिव और देवताओं का आशीर्वाद

Ganesh Janm va Swaroop
Shani Ki Drishti Ki Katha - Mastak Ka Bhasm Hona

शनि की दृष्टि की कथा — मस्तक का भस्म होना

Ganesh Janm va Swaroop
Ganesh Janm Ka Doosra Mat - Punyak Vrat Aur Vishnu Ka Aashirwad

गणेश जन्म का दूसरा मत — पुण्यक व्रत और विष्णु का आशीर्वाद

Ganesh Janm va Swaroop
Ekdant Ki Katha - Parashuram Se Yuddh Aur Daant Ka Tootna

एकदंत की कथा — परशुराम से युद्ध और दाँत का टूटना

Ganesh Janm va Swaroop