
राम की सेना में हनुमान जी का सेनापति कार्य
Ram Ki Sena Mein Hanuman Ka Senapati Karya
लंका की ओर बढ़ती हुई वानर सेना एक विशाल समुद्र के समान थी, जिसमें असंख्य वीर वानर और भालू सम्मिलित थे। इस विशाल सेना को व्यवस्थित रखना, प्रत्येक वीर को उसके स्थान और कर्तव्य का बोध कराना, तथा युद्ध की रणनीति में प्रभु श्रीराम का सहयोग करना — यह सब हनुमान जी के अपार विवेक और नेतृत्व से ही संभव हो सका। सुग्रीव सेना के अधिपति थे, किंतु हनुमान जी उस सेना के प्राण थे, जिनके बिना कोई भी योजना पूर्ण नहीं होती थी।
हनुमान जी में बल के साथ-साथ बुद्धि का अद्भुत संयोग था। वे नीति के ज्ञाता थे, शास्त्रों के मर्मज्ञ थे और वाणी में ऐसे कुशल थे कि उनके एक वचन से सेना का उत्साह द्विगुणित हो जाता था। जब भी कोई कठिन निर्णय लेना होता, श्रीराम और सुग्रीव हनुमान जी की ओर देखते, क्योंकि वे जानते थे कि इनकी मंत्रणा में दूरदर्शिता और धर्म दोनों का संतुलन रहेगा।
युद्ध के प्रत्येक चरण में हनुमान जी ने सेनापति के समान दायित्व निभाया। वे सेना को व्यूह में सजाते, वीरों को उनके योग्य मोर्चों पर नियुक्त करते और स्वयं सबसे कठिन स्थान पर डटकर खड़े रहते। जहाँ संकट सबसे अधिक होता, वहाँ हनुमान जी सबसे पहले पहुँचते थे। उनकी उपस्थिति मात्र से वानर वीरों में नवीन साहस का संचार हो जाता था और शत्रु के हृदय में भय व्याप्त हो जाता था।
अंगद, नल, नील, जांबवान जैसे महावीरों के बीच हनुमान जी सेतु के समान थे, जो सबको जोड़े रखते थे। किसी में मतभेद उत्पन्न होता तो वे मधुर वाणी से समाधान कर देते, किसी का उत्साह कम होता तो प्रभु की महिमा सुनाकर उसे पुनः प्रज्वलित कर देते। उनका यह गुण उन्हें केवल एक योद्धा नहीं, अपितु सेना का सच्चा संचालक बनाता था।
हनुमान जी सदैव यह स्मरण रखते थे कि यह युद्ध किसी राज्य या यश के लिए नहीं, अपितु धर्म की रक्षा और सीता माता के उद्धार के लिए है। इसी भाव से वे सेना को प्रेरित करते थे कि प्रत्येक वीर प्रभु श्रीराम के कार्य को अपना परम सौभाग्य समझे। उनके इस उपदेश से सेना का प्रत्येक सैनिक भक्ति और वीरता से ओतप्रोत होकर संग्राम में जूझता था।
इस प्रकार हनुमान जी ने अपने विवेक, बल और भक्ति से वानर सेना को विजय के पथ पर अग्रसर किया। यह प्रसंग इस भाव का बोध कराता है कि सच्चा नेतृत्व वही है जो बल के साथ विनम्रता, बुद्धि के साथ भक्ति और अधिकार के साथ सेवा का भाव रखता हो।