
कालनेमि वध — रावण का छल और हनुमान जी की सतर्कता
Kalnemi Vadh — Ravan Ka Chhal
जब रावण को यह ज्ञात हुआ कि हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने हिमालय की ओर गए हैं और उसके आने से लक्ष्मण जी के प्राण बच जाएँगे, तब उसका हृदय चिंता से भर उठा। वह जानता था कि यदि लक्ष्मण जी स्वस्थ हो गए तो उसकी विजय की समस्त आशाएँ धूमिल हो जाएँगी। इसलिए उसने हनुमान जी को मार्ग में ही रोकने और उन्हें छल से नष्ट करने की कुटिल योजना बनाई।
रावण ने कालनेमि नामक एक मायावी राक्षस को बुलाया, जो माया और छल में अत्यंत निपुण था। रावण ने उसे आदेश दिया कि वह किसी भी प्रकार हनुमान जी को उनके पवित्र कार्य से विचलित कर, समय व्यर्थ कराकर, उन्हें रोक ले। यद्यपि कालनेमि जानता था कि हनुमान जी परम भक्त और अजेय हैं, तथा उनसे बैर लेना अंततः मृत्यु को निमंत्रण देना है, फिर भी रावण की आज्ञा और भय के वशीभूत होकर उसने यह कार्य स्वीकार कर लिया।
कालनेमि ने माया से हनुमान जी के मार्ग में एक सुंदर आश्रम और सरोवर रच दिया, तथा स्वयं एक तपस्वी ऋषि का वेश धारण कर लिया। जब हनुमान जी उधर से निकले, तो कालनेमि ने मधुर वाणी से उन्हें बुलाया और कहा कि पथ के इस थकावट भरे मार्ग में जल ग्रहण करके तनिक विश्राम कर लें। हनुमान जी को प्यास लगी थी, अतः वे उस मायावी सरोवर के समीप पहुँचे, किंतु उनके हृदय में सदा जागृत रहने वाला विवेक सचेत था।
जब हनुमान जी जल लेने सरोवर में उतरे, तब एक मायावी ग्राह (मगरमच्छ) ने उनका चरण पकड़ लिया। हनुमान जी ने तत्काल उसे मार डाला, और उसी क्षण उस ग्राह के शरीर से एक शापमुक्त अप्सरा प्रकट हुई, जिसने हनुमान जी को सावधान किया कि यह तपस्वी वास्तव में रावण का भेजा हुआ छली राक्षस कालनेमि है। यह सुनते ही हनुमान जी का समस्त भ्रम दूर हो गया और उन्होंने कपटी का यथार्थ स्वरूप पहचान लिया।
हनुमान जी तुरंत उस कपटी तपस्वी के पास लौटे और उससे गुरु-दक्षिणा के नाम पर अपनी विशाल पूँछ में उसे लपेट लिया। हनुमान जी के प्रबल आघात से कालनेमि का समस्त छल और माया नष्ट हो गई तथा वह अपने वास्तविक राक्षसी रूप में प्रकट होकर धराशायी हो गया। इस प्रकार रावण का यह कपटपूर्ण षड्यंत्र हनुमान जी की सतर्कता के समक्ष विफल हो गया।
छल का नाश करके हनुमान जी पुनः अपने पवित्र कार्य पर आगे बढ़ चले। यह प्रसंग इस भाव को प्रकट करता है कि जिसका हृदय प्रभु-प्रेम और कर्तव्य से पूर्ण हो, उसे संसार की कोई भी माया या छल अपने मार्ग से विचलित नहीं कर सकता।