
भरत का बाण और हनुमान जी का अयोध्या में उतरना
Bharat Ka Baan Aur Hanuman Ka Ayodhya Mein Utarna
संजीवनी बूटी सहित द्रोणगिरि पर्वत को हाथों पर उठाए हनुमान जी जब आकाश-मार्ग से लंका की ओर वेगपूर्वक उड़ रहे थे, तब उनका मार्ग अयोध्या के ऊपर से होकर गुजरा। उस समय अयोध्या में भरत जी अपने भाई श्रीराम के वियोग में तपस्वी जीवन व्यतीत कर रहे थे। वे नंदिग्राम में रहकर प्रतिदिन प्रभु के आगमन की प्रतीक्षा करते और वन में तप करते हुए राज्य का भार अपने कंधों पर वहन कर रहे थे।
उसी क्षण भरत जी की दृष्टि आकाश में उड़ते हुए उस विशाल आकृति पर पड़ी, जो एक पूरे पर्वत को उठाए तीव्र वेग से उड़ रही थी। सजग रक्षक भरत जी को यह आशंका हुई कि कहीं यह कोई मायावी राक्षस तो नहीं, जो प्रजा या ऋषियों पर आक्रमण करने आ रहा हो। धर्म और प्रजा की रक्षा के भाव से उन्होंने तत्काल अपने अचूक धनुष पर बाण चढ़ाया और उस उड़ती हुई आकृति की ओर छोड़ दिया।
भरत जी का वह बाण अमोघ था, और उसके प्रहार से हनुमान जी को धरती पर उतरना पड़ा। किंतु आश्चर्य की बात यह थी कि गिरते समय भी हनुमान जी के मुख से "श्रीराम" नाम का उच्चारण हो रहा था। जब भरत जी ने पास आकर देखा कि यह तो प्रभु का ही नाम जपने वाला कोई परम भक्त है, तो उनका हृदय पश्चाताप और वेदना से भर उठा। उन्होंने विनम्रता से हनुमान जी से क्षमा माँगी।
हनुमान जी ने भरत जी को श्रीराम, लक्ष्मण और सीता माता का समस्त वृत्तांत सुनाया — लक्ष्मण जी की मूर्च्छा, संजीवनी की आवश्यकता, और समय की विकटता। यह सुनकर भरत जी का प्रेम उमड़ पड़ा। उन्होंने कहा कि यदि हनुमान जी को शीघ्र लंका पहुँचना है, तो वे अपने बाण पर बैठकर पल भर में वहाँ पहुँच सकते हैं। भरत जी की यह भ्रातृभक्ति और प्रभु के प्रति व्याकुलता देखकर हनुमान जी अत्यंत प्रसन्न हुए।
हनुमान जी ने विनम्रतापूर्वक भरत जी को प्रणाम किया और उनके अगाध राम-प्रेम की सराहना की। उन्होंने भरत जी को आश्वस्त किया कि प्रभु श्रीराम शीघ्र ही विजयी होकर अयोध्या लौटेंगे। तत्पश्चात भरत जी का आशीर्वाद पाकर हनुमान जी पुनः उसी वेग से आकाश-मार्ग में उड़ चले, ताकि सूर्योदय से पूर्व संजीवनी लंका पहुँच सके।
यह प्रसंग भरत जी की अटूट भ्रातृभक्ति और हनुमान जी की अविचल राम-निष्ठा — दोनों का दर्शन कराता है। इसका भाव यह है कि सच्चे भक्तों का प्रेम जब मिलता है, तब वहाँ भूल भी क्षमा में और बाधा भी आशीर्वाद में परिणत हो जाती है।