Mudrika Dena Aur Sita Ka Vishwas Jeetna

मुद्रिका देना और सीता का विश्वास जीतना

Mudrika Dena Aur Sita Ka Vishwas Jeetna

हनुमान जी ने विचार किया कि यदि वे अचानक माता सीता के सामने प्रकट हो जाएँ, तो वे राक्षस समझकर और भी भयभीत हो सकती हैं। अतः उन्होंने युक्ति निकाली कि पहले वृक्ष पर छिपे-छिपे ही श्रीराम के गुण और उनकी कथा मधुर स्वर में सुनाई जाए, जिससे माता का ध्यान उस ओर आकर्षित हो और उन्हें विश्वास हो कि यह कोई प्रभु का भक्त ही हो सकता है।

हनुमान जी ने कोमल और मीठे स्वर में श्रीराम के जन्म, उनके गुणों, वन-गमन, सीता-हरण और वानरों से मित्रता की सारी कथा क्रम से सुनानी आरम्भ की। यह पावन कथा सुनकर सीता जी चौंक उठीं। उनके मन में आश्चर्य और आशा एक साथ जाग उठी कि इस राक्षसों की नगरी में प्रभु श्रीराम का गुणगान करने वाला कौन हो सकता है। उन्होंने चारों ओर दृष्टि दौड़ाई।

तब हनुमान जी वृक्ष से उतरकर, अत्यन्त विनम्रता से हाथ जोड़कर सीता जी के समक्ष प्रकट हुए। एक वानर को देखकर पहले तो सीता जी को संशय हुआ कि कहीं यह रावण की कोई माया तो नहीं। रावण भी छल से रूप बदल सकता है, यह सोचकर उन्होंने हनुमान जी पर तुरंत विश्वास नहीं किया और सतर्क हो गईं।

सीता जी के मन का संशय दूर करने के लिए हनुमान जी ने प्रभु श्रीराम द्वारा दी गई निशानी — उनकी नाम-अंकित मुद्रिका (अँगूठी) — माता के चरणों में रख दी। जब सीता जी ने उस मुद्रिका को देखा और उस पर अंकित प्रभु का नाम पढ़ा, तो उनका सारा संशय दूर हो गया। उन्होंने उस अँगूठी को हृदय से लगा लिया और उनके नेत्रों से हर्ष के आँसू बह निकले, मानो साक्षात् प्रभु का ही स्पर्श मिल गया हो।

अब सीता जी को पूर्ण विश्वास हो गया कि यह वानर सचमुच प्रभु श्रीराम का ही दूत है। उन्होंने हनुमान जी से प्रभु का कुशल-क्षेम पूछा और यह भी जाना कि श्रीराम तथा लक्ष्मण जी उनके वियोग में कैसे हैं। हनुमान जी ने माता को प्रभु का संदेश सुनाया कि श्रीराम उनके वियोग में अत्यन्त व्याकुल हैं और शीघ्र ही सेना सहित आकर उनका उद्धार करेंगे।

हनुमान जी के वचनों और प्रभु की उस मुद्रिका ने माता सीता के टूटते धैर्य को फिर से सम्बल दे दिया। महीनों के शोक और वियोग के बाद, प्रभु का यह संदेश उनके लिए अमृत के समान था। उन्होंने अनुभव किया कि उनका उद्धार अब निश्चित है और प्रभु उन्हें भूले नहीं हैं।

भाव — प्रभु की एक निशानी भी भक्त के लिए पूरे विश्वास और सांत्वना का स्रोत बन जाती है; सच्चा दूत आशा का दीप जलाता है।

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