
लंका में प्रवेश और भवनों की खोज
Lanka Mein Pravesh Aur Bhavano Ki Khoj
लंकिनी को परास्त कर हनुमान जी सूक्ष्म रूप में लंका नगरी में प्रवेश कर गए। रात्रि का समय था और सारी नगरी सोने में डूबी हुई थी। हनुमान जी ने देखा कि लंका अत्यन्त वैभवशाली नगरी है — ऊँचे-ऊँचे स्वर्ण-भवन, रत्नजड़ित द्वार, सुन्दर उद्यान और चौड़ी सड़कें। परंतु इस सारे वैभव के बीच उन्हें कहीं भी माता सीता का पता नहीं चल रहा था।
हनुमान जी एक-एक भवन में चुपके से प्रवेश कर, वहाँ सोए हुए राक्षसों के बीच सीता माता को खोजने लगे। वे किसी भवन की छत पर चढ़ते, किसी की खिड़की से झाँकते, तो कहीं द्वार की ओट से भीतर देखते। उन्होंने अनेक राक्षस-वीरों को गहरी नींद में सोए देखा, जिनके पास भाँति-भाँति के अस्त्र-शस्त्र रखे थे। परंतु उनकी दृष्टि सदा एक ही बात खोज रही थी — कहीं देवी सीता तो नहीं।
खोजते-खोजते हनुमान जी रावण के विशाल राजभवन तक पहुँचे। वहाँ का वैभव तो अद्भुत था। सोने के स्तम्भ, मणियों से जड़े झरोखे और सुगन्धित कक्ष। हनुमान जी ने रावण के शयनकक्ष में भी प्रवेश किया, जहाँ रावण अपनी अनेक रानियों के बीच सो रहा था। वहाँ इतनी सुन्दर स्त्रियाँ थीं कि एक क्षण को हनुमान जी को शंका हुई कि कहीं इनमें सीता माता तो नहीं।
परंतु तुरंत ही उनका विवेक जाग उठा। उन्होंने मन में विचार किया कि जो देवी अपने पति श्रीराम के वियोग में तपस्विनी के समान दुःख भोग रही होंगी, वे इस भोग-विलास के बीच, प्रसन्न मुद्रा में कैसे सो सकती हैं। सीता जी तो प्रभु के चरणों में ही अपना मन लगाए बैठी होंगी। यह सोचकर उन्होंने अपने मन की उस शंका को त्याग दिया और स्वयं को धिक्कारा कि ऐसा विचार भी क्यों आया।
हनुमान जी ने रावण के भवन, नगर के भवन, उद्यान और भोजनशालाएँ सब जगह खोज लीं, पर सीता माता कहीं न मिलीं। एक क्षण को उनके मन में निराशा घिरने लगी कि यदि माता का पता न चला तो प्रभु को क्या उत्तर दूँगा; इस विशाल नगरी में वे कहाँ होंगी? पर तुरंत ही उन्होंने अपने मन को समझाया कि निराशा से कार्य नहीं होता, धैर्य और श्रद्धा से ही मार्ग मिलता है।
तभी उनके मन में विचार आया कि जहाँ भवनों में सीता नहीं मिलीं, वहाँ किसी उपवन या वाटिका में उन्हें रखा गया होगा। यह विचार आते ही उनकी आशा फिर से जीवित हो उठी और वे नई ऊर्जा के साथ नगर के बाहरी उद्यानों की ओर बढ़ चले।
भाव — विवेक ही सच्चा प्रकाश है; धैर्य न छोड़ने वाला भक्त ही अपने लक्ष्य तक पहुँचता है।