
लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध में हनुमान जी का सहयोग
Lakshman-Meghnad Yuddh Mein Sahyog
रावण का पुत्र मेघनाद, जिसे इंद्र को पराजित करने के कारण इंद्रजित भी कहा जाता था, समस्त राक्षस सेना का सर्वाधिक भयंकर और मायावी योद्धा था। उसे अनेक दिव्यास्त्रों और माया-विद्या का ज्ञान था, तथा वह अदृश्य होकर युद्ध करने में निपुण था। जब उसका सामना लक्ष्मण जी से हुआ, तब वह युद्ध इतना भयंकर था कि उसे देखकर आकाश के देवता भी विस्मित रह गए। इस निर्णायक संग्राम में हनुमान जी ने लक्ष्मण जी का अद्वितीय सहयोग किया।
मेघनाद अपनी माया से बार-बार अदृश्य हो जाता और छिपकर बाणों की वर्षा करता, जिससे उससे युद्ध करना अत्यंत कठिन हो जाता था। ऐसे में हनुमान जी सदा लक्ष्मण जी के समीप ढाल के समान खड़े रहते और उन पर आने वाले संकटों से उनकी रक्षा करते थे। जब मेघनाद माया रचकर वानर सेना को भ्रमित करता, तब हनुमान जी अपने विवेक से उसे पहचानते और सेना को सचेत कर देते।
इस भीषण युद्ध में हनुमान जी ने लक्ष्मण जी को अपने कंधों पर बैठाकर युद्धभूमि में इस प्रकार गति दी कि लक्ष्मण जी सुगमता से मेघनाद पर प्रहार कर सकें। जब लक्ष्मण जी हनुमान जी के सुदृढ़ कंधों पर स्थिर होकर बाण चलाते, तब उनका निशाना अचूक होता था। इस प्रकार हनुमान जी उनके लिए एक अडिग आधार बन गए, जिस पर टिककर लक्ष्मण जी अपने पूर्ण बल का प्रयोग कर सके।
घायल होने पर भी हनुमान जी विचलित नहीं हुए और उन्होंने लक्ष्मण जी की रक्षा में तनिक भी प्रमाद नहीं किया। जब-जब मेघनाद कोई भयंकर मायावी अस्त्र चलाता, हनुमान जी अपने विशाल शरीर से लक्ष्मण जी को आवृत कर लेते। उनकी यह निष्ठा और स्वामिभक्ति देखकर लक्ष्मण जी का उत्साह और भी बढ़ जाता था। दोनों की यह जोड़ी — एक ओर लक्ष्मण जी का पराक्रम और दूसरी ओर हनुमान जी का बल तथा विवेक — मेघनाद के लिए दुर्जेय सिद्ध हुई।
अंततः लक्ष्मण जी ने अपने अमोघ बाण से मेघनाद का अंत कर दिया, और उस विजय में हनुमान जी का सहयोग अविस्मरणीय रहा। जब मेघनाद जैसा भयंकर योद्धा धराशायी हुआ, तब समस्त वानर सेना में हर्ष की लहर दौड़ गई और रावण की समस्त आशाएँ टूट गईं। इस विजय ने युद्ध का पासा पूर्णतः श्रीराम के पक्ष में मोड़ दिया।
यह प्रसंग इस भाव को प्रकट करता है कि सच्चा सहयोगी वही है जो साथी की विजय में अपना अहंकार नहीं, अपितु अपनी संपूर्ण शक्ति और निष्ठा अर्पित कर दे। हनुमान जी का यह सहयोग सेवा और समर्पण के आदर्श का जीवंत उदाहरण है।