Tune Heera So Janam Gamayo
तूने हीरा सो जनम गमायो
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काया माया पाहुणी, और कन्या घर होय ।
राख्खोड़ी रेवे नहीं, उठ चले पत खोय ॥ दोहा ॥
ओ तूने हीरो सो जनम गमायो रे, भजन बिना बावरे ॥ टेक ॥
ना तू आयो सत री संगत में, ना कोई हरी गुण गायो ।
पच-पच मरियो बैल की नांई, सोय स्यों रे उठ खायो, भजन बिना बावरे ॥1॥
ओ संसार हाट बणिये की, सब जग सौदे आयो ।
चतुर माल चोगुणो कीनो, मूरख मूल गंवायो, भजन बिना बावरे ॥2॥
ओ संसार फूल सेमर को, सूवो देख लुभायो ।
मारी चोंच निकल गई रूई, सिर धुन पछतायो, भजन बिना बावरे ॥3॥
ओ संसार माया रो लोभी, ममता महल चुणायो ।
कहत कबीर सुनो भाई साधो, हाथ कुछ नहीं आयो, भजन बिना बावरे ॥4॥
✍️ रचयिता: कबीर
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