Chetavni Bhajan

Heli Mhari Jagya Ye Purvala Bhag

हेली म्हारी जाग्या ये पूर्वला भाग

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हेली म्हारी जाग्या ये पूर्वला भाग, गुरुजी म्हारे आंगन आया ये। हेली म्हारी जाग्या ये पूर्वला भाग, गुरुजी म्हारे आंगन आया ये ॥ टेक ॥ जब सतगुरु म्हारे आंगन आया, भ्रम दूर गया सब भाग। गुरुजी म्हारे आंगन आया ये ॥1॥ सब संग तोड गुरु संग जोडी, कुटुम्ब कबीलों दियो त्याग। गुरुजी म्हारे आंगन आया ये ॥2॥ कागा से मोहे हंस बणाया, निर्भय लगन रही लाग। गुरुजी म्हारे आंगन आया ये ॥3॥ कहत कमाल कबीर सारी लडकी, पायो अमर सुहाग। गुरुजी म्हारे आंगन आया ये ॥4॥

✍️ रचयिता: कबीर दास

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