Chetavni Bhajan

Tune Ajab Racha Bhagwan Khilona Mati Ka

तूने अजब रचा भगवान खिलौना माटी का

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तूने अजब रचा भगवान खिलौना माटी का, माटी का रे, माटी का, माटी का रे, माटी का ॥ टेक ॥ कान दिए हरि भजन सुनन को, तु मुख से कर गुणगान, खिलौना माटी का, तूने अजब रचा भगवान खिलौना माटी का ॥1॥ जीभा दी हरि भजन करन को, दी आँखें कर पहचान, खिलौना माटी का, तूने अजब रचा भगवान खिलौना माटी का ॥2॥ शीश दिया गुरु चरण झुकन को, और हाथ दिए कर दान, खिलौना माटी का, तूने अजब रचा भगवान खिलौना माटी का ॥3॥ सत्य नाम का बना ले बेड़ा, और उतरे भव से पार, खिलौना माटी का, तूने अजब रचा भगवान खिलौना माटी का ॥4॥

इस भजन के बारे में

यह भजन हमें याद दिलाता है कि हमारा शरीर ईश्वर द्वारा बनाई गई मिट्टी की एक अनमोल रचना है। इस भजन का मुख्य भाव यह है कि भगवान ने हमें यह मनुष्य जीवन केवल सांसारिक सुखों के लिए नहीं, बल्कि उनकी भक्ति और सेवा के लिए दिया है। हमारे कान प्रभु के भजन सुनने के लिए हैं, मुख उनकी स्तुति करने के लिए, और हाथ परोपकार व दान के लिए हैं। यह रचना हमें सिखाती है कि यह नश्वर शरीर एक खिलौने के समान है, जो एक दिन मिट्टी में मिल जाएगा, इसलिए हमें अपने समय का सदुपयोग सत्कर्मों में करना चाहिए।

यह भजन विशेष रूप से वैराग्य और आत्म-चिंतन के भाव को जगाने वाला है। भक्त इसे अक्सर सत्संग, एकांत प्रार्थना या सुबह की शांति के समय गाते हैं ताकि वे अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझ सकें। इसे गाने से मन में विनम्रता आती है और अहंकार का नाश होता है। यह हमें गुरु के चरणों में शीश झुकाने और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है, जिससे हम इस संसार रूपी भवसागर को आसानी से पार कर सकें। यह भजन हमें हर पल ईश्वर की कृपा का स्मरण कराता है।

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