Chetavni Bhajan

Thari Chunadli Ro Chatko Din Char

थांरी चूनड़ली रो चटको दिन चार

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ओ थांरी चूनड़ली रो चटको दिन चार, पुराणी भई चूनड़ली ॥ टेक ॥ आँख्यां सूं सूझे नहीं रे, सुणे नहीं दूनूं कान। दाँत बतीसी बाहर आ गई, बिगड़ी चूनड़ली री शान ॥1॥ सळ पड़िया शरीर में रे, अब तो भज भगवान। रंग गुलाबी उड़ गयो रे, बिगड़ी चूनड़ली री शान ॥2॥ सुध-बुध भूल्यो शरीर री रे, थोड़ो भावे धान। डगमग-डगमग नाड़ चाले, क्यूं तू भूल्यो भगवान ॥3॥ खाले-पीले और खर्च ले, कर चूनड़ी रो मान। प्रतापगिरी यूं कहे बन्दा, लागे गुरुजी रो ज्ञान ॥4॥

✍️ रचयिता: प्रतापगिरी

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