Chetavni Bhajan

Surta Ho Ja Bhajan Ri

सुरता हो जा भजन री

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गुरु बिन माळा न फेरिये, गुरु बिन लीजे न दान। गुरु बिन दान नहीं काम का, तो पूछो वेद कुरान।। दोहा सुरता हो जा नी भजन री लार, दिखा दूं थने राम नगरी। राम नगरी ओ सुरता प्रेम नगरी, राम नगरी ओ सुरता प्रेम नगरी, सुरता हो जा हो जा भजन री लार, दिखा दूं थने राम नगरी।। ॥ टेक ॥ सुरता थारे ऊपर बेरियाँ रो वास, मारेला थने गेब री घड़ी। भई भई सिर पर भम रयो काळ, जगत सूं थूं तो जाएला परी।। ॥1॥ सुरता सात समद दरियाव, अधबिच में जहाज अटक पड़ी। भई भई किण विध उतरेला पार, फाँसी तो मोहा जाल री करी।। ॥2॥ सुरता निर्धन धार आधार, बाबोसा तो है अटल पुरी। सुरता जा रे नित रा दीप संचार, सूरज उगो सेहस री घड़ी।। ॥3॥ सुरता गुरु मिल्या नाथ गुलाब, दीनी रे म्हाने अमर झड़ी। भई भई गावे गावे भवानी रे नाथ, संगत सूं म्हारी काया सुधरी।। ॥4॥

✍️ रचयिता: नाथ गुलाब

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