Chetavni Bhajan

Sumiran Kar Le Mere Mana Re

सुमिरन कर ले मेरे मना रे

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तेरा संगी कोई नहीं, सब स्वारथ बंधी लोइ। मन परतीति न उपजौ, जीव बेसास न होइ॥ दोहा॥ सुमिरन कर ले मेरे मना रे, बीते उम्र हरी नाम बिना रे॥ टेक॥ हस्ती दन्त बिना, पंछी पंख बिना, नारी सूनी पुरुष बिना रे, जैसे पुत्र पिता बिना हीना, तैसे ही प्राणी हरी नाम बिना रे॥1॥ कूप नीर बिन, धेनु सीर बिन, धरती सूनी मेह बिना रे, जैसे तरुवर फल बिना हीना, तैसे ही प्राणी हरी नाम बिना रे॥2॥ देह नैन बिन, रैन चन्द्र बिन, मंदिर सूना दीपक बिना रे, जैसे पंडित वेद बिन हीना, तैसे ही प्राणी हरी नाम बिना रे॥3॥ काम क्रोध मद लोभ निवारो, सम्पत राखो सभी जना रे, कहे नानक सुणो भगवंता, इस जग में कोई नहीं अपना रे॥4॥

✍️ रचयिता: गुरु नानक देव

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