Chetavni Bhajan

Sitaram Bol Radhe Shyam Bol

सीताराम बोल राधे श्याम बोल

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यहीं चलाएँ · Play here
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सीताराम बोल राधे श्याम बोल नर क्यों न बोल र, इया काई डोल र ॥ टेक ॥ काम क्रोध मद लोभ मोह ये दुष्ट धुरंधर बाका र, घेर चाल रोक लिया सारा चार्यू मेर का नाका र। नेम धर्म सत्संग शरण संता कि होल र, इया काई डोल र ॥1॥ मार ज्ञान को तीर पहन ले भजन कवच सीना पर, तन मन कर ले काबू में हरि दया कर दीना पर। गंग में नहा ले भाग दाग दिलडा को धो ले र, इया काई डोल र ॥2॥ जीभ थारी मेंढक की ज्यूं थारा कान सांप का बिलडा र, हरि भजन से विमुख भयो बेकार गवा दिया दिनडा र। मन में मनसा पाप कपट का गुठला डोल र, इया काई डोल र ॥3॥ लुख छिप छान ओल नित नया कर्म कमा रयो खोटा र, नजर चराचर ईश्वर की मत बांध पाप की पोटा र। दे दे मुख यमदूत नरक को खातां खोल र, इया काई डोल र ॥4॥ पंथ नरक को पावे मत अपनावे नर परनारी न, तीर जैसी भगवान सहाय भव सागर भज बनवारी न। सत की होसी न्याय धर्म कांटा पर डोल र, इया काई डोल र ॥5॥

इस भजन के बारे में

यह भजन प्रभु श्री सीताराम और श्री राधे-श्याम के पावन नाम का स्मरण करने की प्रेरणा देता है। इसका मुख्य भाव यह है कि मनुष्य सांसारिक मोह-माया, क्रोध और लोभ के जाल में फंसकर अपना जीवन व्यर्थ गंवा रहा है। संत इस भजन के माध्यम से हमें सचेत करते हैं कि यह जीवन क्षणभंगुर है, इसलिए व्यर्थ की बातों में समय नष्ट करने के बजाय हमें प्रभु के नाम का आश्रय लेना चाहिए। यह भजन हमें ज्ञान का कवच धारण करने और अपने मन व इंद्रियों को वश में रखकर सत्संग के मार्ग पर चलने का संदेश देता है।

भक्त इस भजन को विशेष रूप से कीर्तन, सत्संग या एकांत में प्रभु का ध्यान करते समय गाते हैं। इसका उद्देश्य मन की शुद्धि करना और अंतरात्मा को पापों से मुक्त करना है। जब भी मन में नकारात्मक विचार आएं या जीवन की भागदौड़ में शांति की कमी महसूस हो, तब इस भजन को गाने से मन को प्रभु की भक्ति में एकाग्र करने में सहायता मिलती है। यह हमें याद दिलाता है कि अंत समय में केवल प्रभु का नाम ही साथ जाता है, इसलिए हमें आज ही से अपने कर्मों को सुधारकर ईश्वर की शरण में समर्पित हो जाना चाहिए।

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