Chetavni Bhajan

Saatho Bhai Hardam Har Hai Bhela

साथो भाई हरदम हर है भेला

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यहीं चलाएँ · Play here
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साथो भाई हरदम हर है भेला। कर सत्संग खोज घट भीतर, खोज्याँ खबर पड़ेगा ॥ टेक ॥ यह संसार अंधो का अंधा, सूजे नांही गेला। क्रिया कर्म में मारे भचेड़ा, कबहु ना भ्रम मिटेला ॥1॥ धाम करे तीरां नहावे, पत्थर जाय पूजेला। गोता खाय फिर घर में आवे, ईश्वर नांही मिलेला ॥2॥ घर में ईश्वर दूर खोजते, इसी में जन्मे मरेला। जो जन हरि को दूर बतावे, चौरासी भुगतेला ॥3॥ सहजै भ्रम मिटे सब तेरा, हो सतगुरु का चेला। रोम रोम परमेश्वर दरसे, निख परख चित देला ॥4॥ गुरु सुखराम हरि रूप सदाई, आदि अंत मध्य पेला। अचलूराम नित दर्शन करता, दुतिया दूर करेला ॥5॥

✍️ रचयिता: संत अचलूराम

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