Chetavni Bhajan

Raja Bhartari Bhajan

जल जोगी जमराज अग्नि से अलबत डरना

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जल जोगी जमराज अग्नि से अलबत डरना । भूल चूक महाराज, भरोसा कबहुँ ना करना ॥ दोहा हुई सफल कमाई महाराज भरतरी ओ थारी, भरतरी ओ थारी । ईश्वर रे कारण जोग फकीरी धारी । मालिक रे कारण जोग फकीरी धारी ॥ टेक ॥ राजा सूतो महल रे माँय, तरपणा जागी, ओ तरपणा जागी । ज्यां ने मिल गया गोरखनाथ, भरमना भागी ॥1॥ राजा गियो जंगल रे माँय, दे रयो हेलो, दे रयो हेलो । ज्यां ने मिल गया गोरखनाथ, मुंड लियो चेलो ॥2॥ राजा जावो शहर रे माँय, दे आवो फेरी, दे आवो फेरी । पिंगला ने कहिजो मात, करो मत देरी ॥3॥ राजा गियो महल रे माँय, दे रयो फेरी, ओ दे रयो फेरी । भिक्षा घालो पिंगला मात, करो मत देरी ॥4॥ राणी खड़ी महल रे माँय, लटिया तोड़े, ओ लटिया तोड़े । राजा एक दिन पकड़यो हाथ, प्रीत काई तोड़े ॥5॥ राणी खड़ी झोपड़ी रे बीच, कल्प रही काया, कल्प रही काया । ज्यां रा मरजो गोरखनाथ, राज छुड़वाया ॥6॥ राणी मत दे गुरु ने गाल, करम रेखा न्यारी, करम रेखा न्यारी । म्हारे लिखिया विधाता लेख, टळे नहीं टाळी ॥7॥ इक सोहन शिखर रे बीच सांकड़ी ओ सेरी, सांकड़ी ओ सेरी । ए तो गावै जरणनाथ, भजन रा ओ लहरी ॥8॥

✍️ रचयिता: जरणनाथ

इस भजन के बारे में

यह भजन महान संत राजा भर्तृहरि के वैराग्य और उनके जीवन परिवर्तन की गाथा को समर्पित है। इसका भावार्थ यह है कि संसार के मोह-माया, महल और राज-पाट क्षणभंगुर हैं। भर्तृहरि ने गुरु गोरखनाथ की कृपा से सांसारिक बंधनों को त्यागकर ईश्वर की भक्ति का मार्ग चुना। भजन हमें याद दिलाता है कि मृत्यु और समय का चक्र किसी को नहीं छोड़ता, इसलिए मनुष्य को व्यर्थ के अहंकार को छोड़कर प्रभु के चरणों में ध्यान लगाना चाहिए।

भक्त इस भजन को वैराग्य जगाने और मन की शांति के लिए गाते हैं। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए प्रेरणादायक है जो जीवन की भागदौड़ में उलझे हुए हैं और ईश्वर की खोज करना चाहते हैं। इसे सुनने या गाने से मन में संसार के प्रति मोह कम होता है और आत्म-चिंतन की भावना जागृत होती है। यह भजन हमें सिखाता है कि सच्चे गुरु का सानिध्य मिलने पर ही मनुष्य का भ्रम दूर होता है और वह अपने वास्तविक लक्ष्य, यानी परमात्मा को प्राप्त कर सकता है।

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