Raja Bhartari Bhajan
जल जोगी जमराज अग्नि से अलबत डरना
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✍️ रचयिता: जरणनाथ
इस भजन के बारे में
यह भजन महान संत राजा भर्तृहरि के वैराग्य और उनके जीवन परिवर्तन की गाथा को समर्पित है। इसका भावार्थ यह है कि संसार के मोह-माया, महल और राज-पाट क्षणभंगुर हैं। भर्तृहरि ने गुरु गोरखनाथ की कृपा से सांसारिक बंधनों को त्यागकर ईश्वर की भक्ति का मार्ग चुना। भजन हमें याद दिलाता है कि मृत्यु और समय का चक्र किसी को नहीं छोड़ता, इसलिए मनुष्य को व्यर्थ के अहंकार को छोड़कर प्रभु के चरणों में ध्यान लगाना चाहिए।
भक्त इस भजन को वैराग्य जगाने और मन की शांति के लिए गाते हैं। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए प्रेरणादायक है जो जीवन की भागदौड़ में उलझे हुए हैं और ईश्वर की खोज करना चाहते हैं। इसे सुनने या गाने से मन में संसार के प्रति मोह कम होता है और आत्म-चिंतन की भावना जागृत होती है। यह भजन हमें सिखाता है कि सच्चे गुरु का सानिध्य मिलने पर ही मनुष्य का भ्रम दूर होता है और वह अपने वास्तविक लक्ष्य, यानी परमात्मा को प्राप्त कर सकता है।
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