Chetavni Bhajan

Papi Ke Mukh Se Ram Koni Nikle

पापी के मुख से राम कोणी निकले

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पापी के मुख से राम कोणी निकले, केसर ढुल गई गारे में। मिनख जमारो बंदा ऐल्यो मत खोई ना, सूरत कर ले जमारे ना ॥ टेक ॥ भैंस पड़ानी गहनों पहनायो, के जाने नोसर हारा ने। पहुण कोणी जाने, वा तो ओढ कोणी जाने, उम्र गमादी गोबर गारे में ॥1॥ सोने की थाल में सुरड़ी परोसी, के जाने जिमण हारा ने। जिम कोणी जाने, वा तो झूठ कोणी जाने, हुलड़-हुलड़ मर गई जमारे में ॥2॥ काँच के महल में कुतिया सुहाणी, के रंग चौबारे में। सोया कोणी जाने, वा तो ओढ कोणी जाने, भूष-भूष मर गई जमारे में ॥3॥ मानक मोती मूर्खा मिल गया, दलबा तो बैठ गया सारा ने। हीरे की पारख जौहरी जाने, के जाने मूर्ख गंवार ने ॥4॥ अमृत नाथ अमर भया जोगी, जार गए काचे पारे ने। भज भजन हरिराम का कर ले, हरि मिले दसवाँ द्वारे में ॥5॥

✍️ रचयिता: अमृत नाथ

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