Odhe Chunariya Mein To Gayi Re Satsang Mein
ओढ़े चुनरिया में तो गई रे सत्संग में
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ओढ़े चुनरिया में तो गई रे सत्संग में,
साँवरिया ने रंग दीनी गहरे-गहरे रंग में ॥ टेक ॥
सोच रही मन में, समझ रही दिल में,
थारो-म्हारो न्याव होवेला सत्संग में ॥1॥
संत री संगत में गुरुसां विराजे,
कर-कर दर्शन होई रे मगन में ॥2॥
सत री संगत में सहेलियाँ विराजे,
गाय-गाय हरि गुण होई रे मगन में ॥3॥
संत री संगत में ज्योत जगे है,
कर-कर आरती होई रे मगन में ॥4॥
संत री संगत में राम रस बरसे,
पी-पी राम रस होई रे मगन में ॥5॥
बाई मीरा कहवे प्रभु गिरधर नागर,
भवजल पार उतारो पल-छिन में ॥6॥
✍️ रचयिता: मीरा बाई
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