Meera Bai

Suto Rano Sukh Bhar Neend

सुतो राणो सुख भर नींद

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सुतो राणो सुख भर नींद, मेवाड़ी राणा ओ, सुतोंड़ा राणा ने सूपनो आवियो। आयो-आयो आळ जंजाले, मेवाड़ी राणा ओ, मीरा ने देखी रे भगवां वेश में ॥ टेक ॥ उठ्यो राणो आलस मरोड़, मेवाड़ी राणा ओ, धम-धम करतां महलां सूं उतरयो। उठो साथी करलमिया सिंगार, मेवाड़ी राणा ओ, परभाते जाणो रे म्हाने मेड़ते ॥1॥ सामा मिला गाया रा गेवाल, मेवाड़ी राणा ओ, मारगियो बताय दे मीरा रे देश रो। डावी डांडी पुष्कर मांहे जाय, मेवाड़ी राणा ओ, लिमणोड़ी जासी रे सीधी मेड़ते ॥2॥ सामी मिलगी पाणी री पनिहार, मेवाड़ी राणा ओ, घर तो बता दे मीरा रे बाप रो। सूरज सामी ढदाजी री पोल, मेवाड़ी राणा ओ, केळ झबुके मीरा रे आंगणे ॥3॥ सामी मिलगी साधा री जमात, मेवाड़ी राणा ओ, बीच में आवे मेड़तणी नाचती। चढ़गी-चढ़गी राणेजी ने रीस, मेवाड़ी राणा ओ, काढ़े खड़ग, राणो कोपियो ॥4॥ मीरा हो गई एकण री हजार, मेवाड़ी राणा ओ, किणकिण मीरा ने राणो मारसी। मोड़ो जाग्यो मूरख गिंवार, मेवाड़ी राणा ओ ॥5॥

✍️ रचयिता: मीरा बाई

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