Rane Var Ra Kai Parniyu (Meera Bai Bhajan)
राणे वर रा काईं परणीयूँ (मीराबाई भजन)
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इस भजन के बारे में
यह भजन भक्त शिरोमणि मीराबाई के अनन्य प्रेम और दृढ़ विश्वास को दर्शाता है। इसमें मीराबाई कहती हैं कि उन्होंने किसी नश्वर राजा से विवाह नहीं किया, जो जन्म-जन्मांतर के चक्र में फँसा हो। उनका विवाह तो साँवले प्रभु श्री कृष्ण से हुआ है, जिससे उनका सुहाग अमर हो गया है। यह भजन मीरा के इस अटल निश्चय को प्रकट करता है कि उनके पति, उनके स्वामी केवल और केवल गिरधर गोपाल ही हैं।
यह भजन भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है, जिन्हें मीरा ने अपना सर्वस्व, अपना पति मान लिया था। इसमें मीरा के जीवन की उन घटनाओं का भी संकेत है जब राणा ने उन्हें विष का प्याला भेजा या सांपों से भरी पिटारी भेजी, लेकिन प्रभु की कृपा से वे सभी बाधाएँ अमृत और हार में बदल गईं। यह भजन भक्त और भगवान के बीच के गहरे, अलौकिक संबंध को दर्शाता है, जहाँ भक्त का प्रेम हर कसौटी पर खरा उतरता है।
भक्त इस भजन को अपनी भक्ति को दृढ़ करने, प्रभु के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करने और सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठने के लिए गाते हैं। यह भजन विशेष रूप से तब गाया जाता है जब भक्त अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव महसूस करते हैं। इसे गाने से मन को शांति मिलती है, विश्वास बढ़ता है और यह प्रेरणा मिलती है कि सच्ची भक्ति से हर बाधा को पार किया जा सकता है। यह भजन मीरा के त्याग, तपस्या और अटूट प्रेम की याद दिलाता है।
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