Mewadi Rana, Bhajana Se Laage Meera Meethi
मेवाड़ी राणा, भजना से लागै मीरा मीठी
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मेवाड़ी राणा, भजना से लागै मीरा मीठी ।
उदयपुर राणा, भजना से लागै मीरा मीठी ॥ टेक ॥
सँकड़ी गली में म्हारै गिरधर मिलिया,
किस बिध फिरूँ मैं अपूठी ॥1॥
थारो तो राम म्हारै बताओ,
नहीं तो फकीरी थारी झूठी ॥2॥
म्हारो तो राम राणाजी घट-घट बोलै,
थारै हिये की कियाँ फूटी ॥3॥
सास नणद दोराणी, जिठाणी,
जल-बल भई अंगीठी ॥4॥
थे तो साँवरिया म्हारै सिर का सेवरा,
म्हें थारै हाथ की अंगूठी ॥5॥
बाई मीरा के प्रभु गिरधर नागर,
पार तो लगावो नई परीती ॥6॥
✍️ रचयिता: मीरा बाई
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