Mati Khodane To Mahal Banaya
माटी खोदने तो महल बनाया
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माटी खोदने तो महल बनाया, मूर्ख कहे घर मेरा।
नहीं घर तेरा, नहीं घर मेरा, चले जंगल में डेरा जी ॥ टेक ॥
माता कहे बेटा मेरा, बहिन कहे भाई मेरा ओ।
भाया कहे भुजा हमारी, नारी कहे वर मेरा ओ ॥1॥
माता रोवे जन्म-जन्म, बहिन रोवे दीवारा।
घर की तिरिया तेरह दिन रोवे, फेर करे घरवासा जी ॥2॥
कौड़ी-कौड़ी माया जोड़ी, जोड़ ने भरिया थैला ओ।
थैला तो अणाणी में रेला, जीव जावे अकेला जी ॥3॥
चांदी पेरो, सोना पेरो, पेरो तो हिरला हाथ में।
बाल गोल ने हीरा चढ़ावा, तो नई मरण रो ओथा जी ॥4॥
माटी खोदना, माटी बिछाना, माटी संगी रेणा।
जी कहत कबीर सुणो भाई साधो, माटी में मिल जेणा जी ॥5॥
✍️ रचयिता: कबीर दास
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