Chetavni Bhajan

Man Re Satguru Kar Mera Bhai

मन रे सतगुरु कर मेरा भाई

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मन रे सतगुरु कर मेरा भाई, सतगुरु बिना कौन है तेरो, अन्त समय रै मांही, मन रे सतगुरु कर मेरा भाई ॥ टेक ॥ जब महा कष्ट पड़ैगो तुझपे, कोई आडो नहीं आई, मात-पिता, जिया, सुत, बन्धु, सब ही मुँह छुपांई ॥1॥ धन, जोवन और महल-मालिया, सब धयों रह जांई, जब यमराज लेवण ने आवैं, जूत खावतो जाई ॥2॥ राज-तेज री चालै नी हेमायती, देवरी चालै नांई, गुरु देख हटे दुःख दुरी, भाग जाय जमराई ॥3॥ गुरु मिलै तो बन्ध छुड़ावै, निर्भय पद को पाई, अचल राम तज सकल आसरा, चरण कमल चितलाई ॥4॥

✍️ रचयिता: अचल राम

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