Maan Aur Samman Ka Sauda
मान और सम्मान का सौदा
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मान और सम्मान का सौदा मिलता नहीं बाजार।
उतर जाय इक बार आबरू ना आये फेर दुबाराँ॥ दोहा
बड़ी मुश्किल से आदमी को, साख बनानी पड़ती है।
आचरण और नीयत को पाक साफ बनानी पड़ती है।
पाँच आदमी पूंछे वो बातें, खास बनानी पड़ती है।
जुबाँ पे करते लोग भरोसा वो धाक बनानी पड़ती है।
दे विश्वास करदे धोखा, उसका जीवन धिक्काराँ॥ टेक ॥
आदमी सामाजिक प्राणी समाज में रहना होता है।
समाज के अच्छे नियमों पे सबको ढलना होता है।
लग जाये ना दाग बुराई, बचके चलना होता है।
घर के बेटा बेटी को संस्कार बताना होता है।
दागी माणस कितना बचले कर देते लोग इशाराँ॥1॥
उतर जाये पगड़ी सिर से इज्जत की मिट्टी करती है।
दहलीज छोड़ जाये नारी वो सदा भटकती रहती है।
गन्दी गाली निकली जो मुँह, वापस ना आया करती है।
सूख जाये एक बार फूल ना खुशबू आया करती है।
भटक जाये गर आदमी पथ से कहते है लोग आवारा॥2॥
बिगड़ जाये व्यवहार तो साहूकार ना गिरने देता है।
खुल जा पोल कंगाली तो कोई हाथ ना रखने देता है।
चोर जार जुआरी को कोई, घर ना घुसने देता है।
फूहड़ गायक को कोई ना सत्संग में गाने देता है।
अशोक पंछी तेरा गांव चुरी करता भगवान गुजाराँ॥3॥
✍️ रचयिता: अशोक पंछी
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