Chetavni Bhajan

Laagi Lagan Mhare Piyuji Milan Ri

लागी लगन म्हारे पियुजी मिलन री

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सतगुरु म्हारा बाणिया, बिणज करे व्यापार। बिन डांडी बिन ताकड़ी, गुरु तोल दिया संसार ॥ दोहा लागी लगन म्हारे पियुजी मिलन री, कोमण कागा उड़ावे। कुटुम्ब कबीला म्हने दाये नहीं आवे, आप मिलिया ती दुख जावे। गुरोंसा म्हने, ओळू आपकी आवे ॥ टेक ॥ दिन नहीं चैन रात नहीं निदरा, दोनों दुखदिया जावे, गुरोंसा म्हने, ओळू आपकी आवे ॥1॥ गुरुजी बिना म्हारे घड़ी नी आवेड़े, नेणों में नीर नी समावे। जळ बिन मछियाँ किसविध जीवे, तड़फ-तड़फ मर जावे, गुरोंसा म्हने, ओळू आपकी आवे ॥2॥ गुरुजी बिना म्हारी काया कलमीजे, अन पाणी नहीं भावे। गळ गया हाड़ माँस और चमड़ी, प्राण पंजरियों में जावे, गुरोंसा म्हने, ओळू आपकी आवे ॥3॥ आठों पहर गुरु री लिव लगगी, और कुणो नहीं सुहावे। लगी आग कालजा में धूणी, केहणी केणों में नहीं आवे, गुरोंसा म्हने, ओळू आपकी आवे ॥4॥ अब मेरे नाथ दया करो पूरी, क्यूं सीयो ने गावावे। कहे जोरदास पिऊ बिन पल नहीं, किस विध प्राण बचावे, गुरोंसा म्हने, ओळू आपकी आवे ॥5॥

✍️ रचयिता: जोरदास

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