Khojat Guru Re Hamara
खोजत गुरू रे हमारा
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खोजत गुरू रे हमारा, खोज करे जाने गुरू कर मानू नही तो, चेला रे गुरू रा रे साधु भाई खोजत गुरू रे हमारा ॥ टेक ॥
कौन बूंद से धरणी थपोणी कौन बूंद असमाना, कुण बूंद प्राणी पिण्ड रचाया कौन बूंद संसारा रे साधु ॥1॥
रजी रे बूंद से धरती थपोणी बर्फ बूंद असमाना, पवन पाणी री प्राणी पिण्ड रचाई उसका करो विचरा ॥2॥
सात तत्व धर नीचा कईये सात तत्व धर ऊँचा, चौहदे तत्वो री खोज बताओ तो जांणो गुरू पुरा ॥3॥
धरणी का भार धवल रे ऊपर धवल सींग सिर धारा, कोरम बूंद किसी को कहिये वांसग है मिण धारा रे साधु ॥4॥
उपन्या जीव कहा लग जावे कहा लग करे रे पियाणा, कहत कबीर सुणो भाई साधो ठावे करो रे ठिकाणा ॥5॥
✍️ रचयिता: कबीर
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