Jhootha Jhagda Mein Kyun Pade
झूठा झगड़ा में क्यूं पड़ै
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✍️ रचयिता: विप्र भंवर
इस भजन के बारे में
यह भजन संत-साहित्य की एक अनमोल रचना है, जो हमें जीवन की नश्वरता और संसार के झूठे मोह-माया के जाल से सावधान करती है। इसका भावार्थ यह है कि मनुष्य इस नश्वर संसार में आकर व्यर्थ के झगड़ों और धन-संपत्ति जोड़ने में अपना अमूल्य समय नष्ट कर देता है। संत हमें याद दिलाते हैं कि यह शरीर और संसार का वैभव केवल कुछ दिनों का मेहमान है, जिसे अंत में यहीं छोड़कर जाना है। यह भजन हमें चेताता है कि प्रभु का भजन छोड़कर सांसारिक सुखों में उलझना मूर्खता है, क्योंकि अंत समय में केवल ईश्वर की भक्ति ही काम आती है।
यह भजन विशेष रूप से उन साधकों के लिए है जो वैराग्य और आत्म-चिंतन की राह पर चलना चाहते हैं। इसे अक्सर सत्संगों, एकांत साधना या मन की शांति के लिए गाया जाता है। जब मनुष्य सांसारिक चिंताओं से घिर जाता है, तब यह भजन उसे यह याद दिलाता है कि असली घर परमात्मा का धाम है। इसे गाने या सुनने से मन में वैराग्य का भाव जागता है और अहंकार का नाश होता है। यह हमें प्रेरित करता है कि हम सतगुरु की शरण में जाकर माया के झूले से बाहर निकलें और अपना जीवन प्रभु के नाम में समर्पित करें।
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