Chetavni Bhajan

Jhootha Jhagda Mein Kyun Pade

झूठा झगड़ा में क्यूं पड़ै

👁 5 views
Jhootha Jhagda Mein Kyun Pade
Text size:
झूठा झगड़ा में क्यूं पड़ै सुधि सोच आगला घर की ॥ टेक ॥ दो दिन कारण जग में आया, सदियों का सामान जुटाया ब्याज भरोसे मूल गंवाया कब तक चालैगी हाटड़ी परदेसी सौदागर की ॥1॥ नाड़ली में नौका पटकै, आखिर जा कीचड़ में अटकै साधु-संत-गुणिजन हटक्कै नाड़ी बिच नैया ना तिरे तिर जाय जहाज समुन्दर की ॥2॥ दौड़-दौड़ दिन रात कमावै, आखिर धाम दूसरे जावै सारा ठाट धरा रह जावै सासरिये सोहे कामणी झूठी आशा पीहर की ॥3॥ यो घर खाली करणो पड़सी, विप्र भंवर तू कब तक अड़सी भजन बिना नर बात बिगड़सी यमदूत लगासी लात की पड़सी चोटों मुगदर की ॥4॥ लाश फूंक वापिस घर आया, झगड़ा कर-कर बांटे माया पिछला सब दुख-दर्द भुलाया धण नाते चाली चाव से कर लिया दूसरा छैला ॥5॥ दुनिया का रंग में मत फूलै, माया के झूले मत झूलै भजन भक्ति हरि की मत भूलै तिर जाय भंवर सूं नावड़ी बणजा सतगुरू का चेला ॥6॥

✍️ रचयिता: विप्र भंवर

इस भजन के बारे में

यह भजन संत-साहित्य की एक अनमोल रचना है, जो हमें जीवन की नश्वरता और संसार के झूठे मोह-माया के जाल से सावधान करती है। इसका भावार्थ यह है कि मनुष्य इस नश्वर संसार में आकर व्यर्थ के झगड़ों और धन-संपत्ति जोड़ने में अपना अमूल्य समय नष्ट कर देता है। संत हमें याद दिलाते हैं कि यह शरीर और संसार का वैभव केवल कुछ दिनों का मेहमान है, जिसे अंत में यहीं छोड़कर जाना है। यह भजन हमें चेताता है कि प्रभु का भजन छोड़कर सांसारिक सुखों में उलझना मूर्खता है, क्योंकि अंत समय में केवल ईश्वर की भक्ति ही काम आती है।

यह भजन विशेष रूप से उन साधकों के लिए है जो वैराग्य और आत्म-चिंतन की राह पर चलना चाहते हैं। इसे अक्सर सत्संगों, एकांत साधना या मन की शांति के लिए गाया जाता है। जब मनुष्य सांसारिक चिंताओं से घिर जाता है, तब यह भजन उसे यह याद दिलाता है कि असली घर परमात्मा का धाम है। इसे गाने या सुनने से मन में वैराग्य का भाव जागता है और अहंकार का नाश होता है। यह हमें प्रेरित करता है कि हम सतगुरु की शरण में जाकर माया के झूले से बाहर निकलें और अपना जीवन प्रभु के नाम में समर्पित करें।

Related Bhajans