Jasoda Hari Palane Jhulave
जसोदा हरि पालनैं झुलावै
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इस भजन के बारे में
यह सुंदर भजन महाकवि सूरदास जी द्वारा रचित है, जिसमें माता यशोदा के वात्सल्य भाव का अद्भुत वर्णन है। इसमें यशोदा मैया अपने लाडले कान्हा को पालने में झुलाते हुए उन्हें सुलाने का प्रयास कर रही हैं। मैया निंदिया रानी को पुकारती हैं कि वे जल्दी आएं और उनके नन्हे गोपाल को सुला दें। जब कान्हा कभी अपनी आँखें मूंदते हैं और कभी मुस्कुराते हैं, तो मैया उन्हें सोता हुआ समझकर चुप हो जाती हैं। यह दृश्य एक माँ के निश्छल प्रेम और ममता की पराकाष्ठा को दर्शाता है।
यह भजन भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप को समर्पित है। भक्त इसे विशेष रूप से जन्माष्टमी के अवसर पर या घर में बाल गोपाल की सेवा करते समय गाते हैं। इस भजन को गाने से मन में वात्सल्य और शांति का भाव जागृत होता है। सूरदास जी कहते हैं कि जो सुख माता यशोदा को अपने बालक को सुलाने में मिल रहा है, वह सुख बड़े-बड़े देवताओं और मुनियों के लिए भी दुर्लभ है। इसे सुनने या गाने से भक्त का मन भक्ति और आनंद से भर जाता है।
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