Aaju Main Gai Charavan Jaihau
आजु मैं गाइ चरावन जैहौं
Loading…
इस भजन के बारे में
यह सुंदर भजन महाकवि सूरदास जी द्वारा रचित है, जिसमें बाल कृष्ण अपनी माता यशोदा से वन में गायें चराने जाने की हठ कर रहे हैं। इस भजन का भाव यह है कि नन्हा कन्हैया अपनी बाल-सुलभ जिद में माता से कहता है कि वह आज गायें चराने अवश्य जाएगा। माता यशोदा अपने लाडले के कोमल चरणों और धूप की चिंता करते हुए उसे रोकने का प्रयास करती हैं, लेकिन कृष्ण अपनी बात पर अडिग हैं। यह प्रसंग भगवान के वात्सल्य और उनके भक्त-वत्सल स्वरूप को दर्शाता है।
भक्त इस भजन को मुख्य रूप से कृष्ण जन्माष्टमी या कान्हा के बाल-लीलाओं के स्मरण के समय गाते हैं। इसे गाने से मन में वात्सल्य भाव जागृत होता है और भक्त स्वयं को यशोदा मैया के प्रेम में डूबा हुआ अनुभव करते हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि भगवान के प्रति अटूट विश्वास और प्रेम ही सच्ची भक्ति है। इसे गाते समय मन में कृष्ण के उस नटखट और प्यारे रूप का ध्यान करने से असीम शांति और आनंद की प्राप्ति होती है।
क्या ठीक नहीं है? चुनें — admin जल्दी सुधार देगा।