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Hamare Hari Haril Ki Lakri

हमारे हरि हारिल की लकरी

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Hamare Hari Haril Ki Lakri
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हमारे हरि हारिल की लकरी। मन क्रम वचन नंद-नंदन उर, यह दृढ़ करि पकरी। जागत सोवत स्वप्न दिवस-निसि, कान्ह-कान्ह जकरी। सुनत जोग लागत है ऐसो, ज्यौं करूई ककरी। सु तौ ब्याधि हमकौं लै आए, देखी सुनी न करी। यह तौ सूर तिनहिं लै सौंपौ, जिनके मन चकरी॥

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