Surdas

Hari Hai Rajniti Padhi Aae

हरि हैं राजनीति पढ़ि आए

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Hari Hai Rajniti Padhi Aae
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हरि हैं राजनीति पढ़ि आए। समुझी बात कहत मधुकर के, समाचार सब पाए। इक अति चतुर हुते पहिलें ही, अब गुरु ग्रंथ पढ़ाए। बढ़ी बुद्धि जानी जो उनकी, जोग-सँदेस पठाए। ऊधौ भले लोग आगे के, पर हित डोलत धाए। अब अपनौ मन फेर पाइहैं, चलत जु हुते चुराए। ते क्यों अनीति करें आपुन, जे और अनीति छुड़ाए। राज धरम तौ यहे 'सूर', जो प्रजा न जाहि सताए॥

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