Surdas

Hari Hai Rajniti Padhi Aae

हरि हैं राजनीति पढ़ि आए

👁 11 views
Hari Hai Rajniti Padhi Aae
Text size:
हरि हैं राजनीति पढ़ि आए। समुझी बात कहत मधुकर के, समाचार सब पाए। इक अति चतुर हुते पहिलें ही, अब गुरु ग्रंथ पढ़ाए। बढ़ी बुद्धि जानी जो उनकी, जोग-सँदेस पठाए। ऊधौ भले लोग आगे के, पर हित डोलत धाए। अब अपनौ मन फेर पाइहैं, चलत जु हुते चुराए। ते क्यों अनीति करें आपुन, जे और अनीति छुड़ाए। राज धरम तौ यहे 'सूर', जो प्रजा न जाहि सताए॥

इस भजन के बारे में

यह पद महाकवि सूरदास द्वारा रचित 'भ्रमरगीत' का एक अत्यंत मार्मिक अंश है। इसमें गोपियाँ उद्धव के माध्यम से श्रीकृष्ण पर व्यंग्य करती हैं कि अब वे मथुरा जाकर राजनीति सीख गए हैं। गोपियों का भाव है कि कृष्ण ने पहले ही बहुत चतुर थे और अब उन्होंने बड़े-बड़े ग्रंथ पढ़ लिए हैं, इसीलिए वे प्रेम के स्थान पर योग का संदेश भेज रहे हैं। वे कहती हैं कि कृष्ण अब बदल गए हैं और अपनी चतुराई से हमें बहला रहे हैं।

यह भजन भगवान श्रीकृष्ण के प्रति गोपियों के अनन्य प्रेम और उनके विरह की व्याकुलता को दर्शाता है। भक्त इसे विशेष रूप से कृष्ण जन्माष्टमी या भक्ति-भाव के कार्यक्रमों में गाते हैं। इस पद का मुख्य संदेश यह है कि सच्चा राजा या ईश्वर वही है जो अपनी प्रजा को दुखी न करे और न्याय का पालन करे। इसे गाने से मन में ईश्वर के प्रति प्रेम और समर्पण का भाव जागृत होता है, जिससे भक्त को कठिन समय में भी धैर्य रखने की प्रेरणा मिलती है।

Related Bhajans