Jani Jagi Jagi Re, Divle Ri
जानी जागी जागी रे, दिवले री
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इस भजन के बारे में
यह भजन माँ ज्वालामुखी और विभिन्न शक्तिपीठों में विराजमान भवानी के प्रति एक अत्यंत भावपूर्ण समर्पण है। इस भजन का मुख्य भाव यह है कि भक्त माँ की जागृत ज्योति के दर्शन कर धन्य हो गया है और माँ से प्रार्थना करता है कि वे कभी भी अपने भक्त से रूठें नहीं। इसमें माँ के विभिन्न स्वरूपों, जैसे नागाणा, बिलाड़ा और गढ़ के किलों से पधारने का वर्णन है, जो यह दर्शाता है कि माँ भवानी अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहती हैं।
भक्त इस भजन को माँ की विशेष पूजा, जागरण या नवरात्रि के पावन अवसर पर गाते हैं। इसे गाने का मुख्य उद्देश्य माँ का आह्वान करना है ताकि वे अपने भक्तों के कष्टों को दूर करें और उनके जीवन में खुशहाली लाएं। इस भजन को गाते समय मन में यह विश्वास होता है कि माँ साक्षात विराजमान हैं और वे अपने भक्तों की पुकार सुनकर उनके सभी बिगड़े काम संवार देती हैं। यह भजन मन को शांति और शक्ति प्रदान करने वाला है।
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