Mata Rani

Jani Jagi Jagi Re, Divle Ri

जानी जागी जागी रे, दिवले री

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यहीं चलाएँ · Play here
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जय माता ज्यालामुखी, जय-जय जगत करी। वर दे अपने भक्त को, माँ तोये काज सरी ॥ दोहा जागी जागी जागी रे, दिवले री जोत जागी रे। म्हारा सूं मत करजे भवानी रीसणो ॥ टेक ॥ आज म्हाने मनड़े रो सोवन मोर बोले ओ। बरसां सूं आई जगदम्बा पांवणी ॥1॥ खेजड़ला सूं चढ़ी भवानी, भक्तां री रखवाली मां। आय ने भक्तां ने दरसप देबिया ॥2॥ नागाणा सूं चढ़ी भवानी, सिंह करी किलकारी मां। आय ने भक्तां रा काज सरिया ॥3॥ गढ़ किल्ला सूं उतरी भवानी, गढ़ में नौबत बाजे मां। काळा गीरा भैरू मां रे साथ में ॥4॥ बिलाड़ा सूं चढ़ी भवानी, सिंह तरपे असवारी मां। शरणो आयां री लजिया राखजो ॥5॥ लुंगड़ियो भैरू माता थारे अगवाणी रे। चाढ़ूं धजा देवी रे देवरे ॥6॥ भक्त मनावे माता सुणियां बेगी आजो रे। सिंवकं में नित उठ थाने देवरो ॥7॥

इस भजन के बारे में

यह भजन माँ ज्वालामुखी और विभिन्न शक्तिपीठों में विराजमान भवानी के प्रति एक अत्यंत भावपूर्ण समर्पण है। इस भजन का मुख्य भाव यह है कि भक्त माँ की जागृत ज्योति के दर्शन कर धन्य हो गया है और माँ से प्रार्थना करता है कि वे कभी भी अपने भक्त से रूठें नहीं। इसमें माँ के विभिन्न स्वरूपों, जैसे नागाणा, बिलाड़ा और गढ़ के किलों से पधारने का वर्णन है, जो यह दर्शाता है कि माँ भवानी अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहती हैं।

भक्त इस भजन को माँ की विशेष पूजा, जागरण या नवरात्रि के पावन अवसर पर गाते हैं। इसे गाने का मुख्य उद्देश्य माँ का आह्वान करना है ताकि वे अपने भक्तों के कष्टों को दूर करें और उनके जीवन में खुशहाली लाएं। इस भजन को गाते समय मन में यह विश्वास होता है कि माँ साक्षात विराजमान हैं और वे अपने भक्तों की पुकार सुनकर उनके सभी बिगड़े काम संवार देती हैं। यह भजन मन को शांति और शक्ति प्रदान करने वाला है।

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