Ho Devaliye Ram Jay
हो देवळिये रम जाय
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सिंह चढ़ी देवी मिले, और गरूड़ चढ़े भगवान।
बैल चढ़े शिवजी मिले, तो पूर्ण हो सिद्ध काम ॥ दोहा ॥
हो देवळिये रम जाय माड़ि रे मंदिरिये रम जाय।
चौसठ जोगणी रे, देवी रे देवळिये रम जाय।
घूमर घालणी ए, देवी रे मन्दिरिये रम जाय ॥ टेक ॥
हंस सवारी कर जगदम्बा, ब्रह्मा रूप बनायो।
ब्रह्मा रो रूप बनायो भवानी, ब्रह्मा रूप बनायो।
चार वेद मुख चार कहिजे, चारां रो जश गायो ॥1॥
गरूड़ सवारी कर जगदम्बा, विष्णु रूप बनायो।
विष्णु रो रूप बनायो भवानी, विष्णु रूप बनायो।
गदा पद्म शंख चक्र विराजे, मधुबन बीन बजायो ॥2॥
बैल सवारी कर जगदम्बा, शिवजी रूप बनायो।
शिवजी रो रूप बनायो भवानी, शिवजी रूप बनायो।
जटा मुकुट में गंगा सोवे, शेष नाग लिपटायो ॥3॥
सिंह सवारी कर जगदम्बा, शक्ति रो रूप बनायो।
शक्ति रो रूप बनायो भवानी, शक्ति रूप बनायो।
सियाराम तेरी करे स्तुति, भक्त मण्डल जस गायो ॥4॥
✍️ रचयिता: सियाराम
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