Mata Rani

Thane Vinti Karu Main Barambar

थाने विनती करूं मैं बारम्बार

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थाने विनती करूं मैं बारम्बार, जगदम्बा म्हारी अरज सुणो। मैं लुळ लुळ लागूं थारे पाँव, करनल किनियाणी अरज सुणो ॥ टेक ॥ बीकोजी ने वचन दियो माँ, मढ रे नींव लगाय। देशनोक में भवन बणायो, बीकाणो नगर बसाय ॥1॥ सेको जी सुल्तान कैद में, घर बाई रो ब्याव। बणत कावली पकड़ पंजा में, फेरां सूं पेली पहुँचाय ॥2॥ गंगासिंह रे रही मदद में, अंग्रेजों री वार। अंग्रेजों ने कुबद कमाई, सूतोड़ो सिंह ने जगाय ॥3॥ सिंह गरजकर आयो गंग पर, हाथळ रोकी जाय। मेहर भई जगदम्बा थारी, सिंहड़े ने दियो रे भगाय ॥4॥ गाँव सिराणो जात ब्राह्मण, दलूराम कथ गाय। करणी सिंह पर अबथळ रखियो, देशनोक वाळी माँय ॥5॥

✍️ रचयिता: दलूराम

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