Mata Rani

Patthar Ki Murat Bol Padi

पत्थर की मूरत बोल पड़ी

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पत्थर की मूरत बोल पड़ी, क्या मुझे मनाने आया है, तेरे घर में मैया तड़प रही, क्या तुझे तरस नहीं आया ॥ टेक ॥ तू छप्पन भोग ले आया है, तेरे घर में मैया भूखी है, दाने-दाने को तरस रही, और मुझे खिलाने आया है ॥1॥ तू जल का लोटा लाया है, तेरे घर में मैया प्यासी है, बूंद-बूंद को तरस रही, और मुझे पिलाने आया है ॥2॥ तू लाल चुनरिया लाया है, तेरी मैया घर में तरस रही, वह तो फटी पुरानी पहन रही, और मुझे पहनाने आया है ॥3॥ तू अपनी मां को मना लेना, सीने से उसे लगा लेना, मेरे सारे कष्ट मिट जाएंगे, क्या मुझे मनाने आया है ॥4॥

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