Chetavni Bhajan

Jagat Mein Sab Matlab Ke Yaar

जगत में सब मतलब के यार

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जगत में सब मतलब के यार, जिसके पास रहे धन-दौलत, उसके मित्र हजार ॥ दोहा ॥ जगत में सब मतलब के यार, जिसके पास रहे धन-दौलत, उसके मित्र हजार ॥ टेक ॥ कोई किसी का नहीं जगत में, ये वेदों का सार, अंत समय में साथ न देंगे, कोठी बंगला कार ॥1॥ चार दिनों के खातिर हमको, जीवन मिला उधार, लूट-पाट कर जोड़ रहे सब, माया अपरम्पार ॥2॥ माता-पिता, बहन और भाई, करते दुर्व्यवहार, स्वार्थ सिद्धि में लगा हुआ है, ये सारा संसार ॥3॥ प्राण-पुण्य में नहीं कोई भी, होता साझेदार, अंत समय में रूठ न जाए, अपना पालनहार ॥4॥

✍️ रचयिता: अज्ञात

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