Nirgun / Satsang

Is Kaya Ka Bhed

इस काया का भेद

👁 2 views
▶ यहीं चलाएँ · Play here
Text size:
इस काया का भेद, गुरु बिन कोई नहीं पाया है ॥ टेक ॥ सूर्य, चंद्रमा, गण और तारे, ये भी आया है। धरण, गगन, पवन और पानी, अधर ठहराया है ॥1॥ समुद्र होय सकल में व्यापक, नजर नहीं आया है ॥2॥ लख चौरासी जीव बनाकर, कलंक लगाया है। पाप से भी भोगे चौरासी, स्वर्ग खद्राया है ॥3॥ नवमनाथ सतगुरु मिलिया पूरा, भरम मिटाया है। पदमनाथ का भेद्रया सपना, तरबत रचाया है ॥4॥

✍️ रचयिता: पदमनाथ

Related Bhajans