Nirgun / Satsang

Beta Shravan Panido Pilay

बेटा श्रवण पाणीड़ो पिलाय

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श्रवण कुमार की कथा श्लोक बेटा श्रवण पाणीड़ो पिलाय, वन में बेटा प्यास लगी ॥ टेक ॥ आला लीला बाँस कटाया, कावड़ ली रे बनाय। मात-पिता ने माय बिठाया, तीर्थ करवाने जाय ॥1॥ ना कोई है कुआँ बावड़ी, ना कोई समंद तलाव। तब श्रवण ने मन में सोची, कहाँ जल पाऊँ मारी माई ॥2॥ ऊँचा-नीचा कदम के ऊपर, बगुला उड़-उड़ जाय। तब श्रवण ने मन में धारी, अब जल पाऊँ मारी माई ॥3॥ ले जारी अब श्रवण चाल्यो, गयो सरवर रे पास। जाय नीर जकोरियो रे, दशरथ मारियो शक्ति बाण ॥4॥ दशरथ वहाँ से चाल्यो रे, आयो श्रवण रे पास। हे विधाता! क्या कर डाला, मारियो भांजा रे बाण ॥5॥ मरतो श्रवण बोल्यो रे, सुण मामा मारी बात। अंधा है मारा मात-पिता जी, वाने पाणीड़ो पिलाये ॥6॥ ले जारी अब दशरथ चाल्यो, गयो कावड़ रे पास। ठंडो जल भर लायो जारी, अब जल पियो मारी माई ॥7॥ नहीं श्रवण की बोली कहीजे, नहीं श्रवण की चाल। मात-पिता तो स्वर्ग सिधारिया, दशरथ ने दियो श्राप ॥8॥

✍️ रचयिता: पारंपरिक

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