Jaag Jaag Ganga Maharani
जाग जाग गंगा महारानी
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जाग जाग गंगा महारानी, दुनिया दर्शन आई ॥ टेक ॥
ब्रह्मा जागे विष्णु जागे, जागे शंकर साईं
निराकार नारायण जागे, ज्यान सृष्टि रचाई ॥1॥
राम भी जागे लक्ष्मण जागे, भरत शत्रुघ्न भाई
हनुमान सा पायक जागे, ज्यान लंक जलाई ॥2॥
पर्वत फोड़ गौमुख निकली, हरिद्वार में आई
हरिद्वार में हर की पैड़ी, हर की हर में समाई ॥3॥
जो गंगा स्नान करत वो बैकुंठा तिर जाई
बास बरेली के लालदास ने गंगा गार सुनाई ॥4॥
✍️ रचयिता: लालदास
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